- उज्जैन में मंदिर क्षेत्र के पास युवक से मारपीट: युवती के साथ होटल जा रहा था, बजरंग दल ने रोका; मोबाइल में अश्लील फोटो-वीडियो होने का आरोप, पुलिस ने जब्त किया फोन
- महाकाल मंदिर में तड़के भस्म आरती, स्वस्ति वाचन के बाद खुले चांदी के पट: रजत मुकुट, त्रिपुण्ड और पुष्पमालाओं से सजे बाबा, “जय श्री महाकाल” से गूंजा परिसर
- एमपी बजट 2026-27: सिंहस्थ के लिए 13,851 करोड़ का प्रस्ताव, उज्जैन में 3,060 करोड़ के नए विकास कार्य; 4.38 लाख करोड़ के कुल बजट में सिंहस्थ और इंफ्रास्ट्रक्चर पर विशेष फोकस
- महाशिवरात्रि पर महाकाल में आस्था का सैलाब: 2 दिन में 8 लाख से ज्यादा श्रद्धालु पहुंचे, शीघ्र दर्शन से 62.50 लाख की आय; 1.95 करोड़ के 410.6 क्विंटल लड्डू प्रसाद की बिक्री
- महाकाल मंदिर में तड़के भस्म आरती, सभा मंडप से गर्भगृह तक गूंजा “जय श्री महाकाल”: स्वस्ति वाचन के बाद खुले चांदी के पट, पंचामृत अभिषेक और भव्य श्रृंगार के साथ हुए दिव्य दर्शन!
दशहरा मैदान में कोरोना जैसा रावण, सिद्धवट पर दस चेहरों पर मास्क व हाथ में सैनिटाइजर बोतल
रावण दहन के आयोजनों पर भी कोरोना का संक्रमण दिखाई दे रहा है। दशहरा मैदान पर कोरोना के चेहरे वाला रावण दिखेगा। सिद्धवट पर रावण के सभी दस मुंह पर मास्क होगा तथा हाथ में सैनिटाइजर की बोतल।
दशहरे के आयोजनों पर भले ही कोरोना संक्रमण रोकने की गाइड लाइन और प्रतिबंधात्मक आदेश लागू हैं लेकिन शहर में दशहरे का उल्लास कम नहीं होगा। दशहरे की परंपरा का निर्वाह प्रतीकात्मक रूप से किया जाएगा। फिर भी 3 दिन तक 6 जगह रावण के पुतलों का दहन होगा।
25 अक्टूबर को दशहरा मैदान व शिप्रा तट, 26 को शास्त्रीनगर, नानाखेड़ा व अंकपात तथा 27 को सिद्धवट पर रावण का पुतला जलाया जाएगा। इन आयोजनों का ऑनलाइन सोशल मीडिया पर सीधा प्रसारण भी किया जाएगा ताकि शहरवासी घर बैठ कर भी रावण दहन के नजारे देख सकें।
आयोजन समितियों के पदाधिकारियों ने प्रतीकात्मक रावण दहन की तैयारी पूरी कर ली है। रावण के पुतले 11 फीट के बनाए जा रहे हैं। एक दिन पहले इन्हें दहन स्थल पर लाकर खड़ा करेंगे। प्रतीकात्मक आतिशबाजी होगी। पुतला दहन स्थल पर नागरिकों को आने की अनुमति नहीं होगी। इसलिए नागरिकों से अनुरोध किया जाएगा कि वे घर से ही लाइव टेलीकास्ट का फायदा लें।
शहर में सबसे प्राचीन अंकपात का दशहरा उत्सव
शहर की सबसे प्राचीन दशहरा परंपरा अंकपात स्थित खाक चौक की है। यहां रावण रूपी पुतले को पत्थर से मारा जाता था। रावण के पुतले का दहन करने की परंपरा दशहरा मैदान पर शुरू हुई। लाला अमरनाथ ने इसे चालू कराया। अब हर साल यह आयोजन होता है। संस्था प्रमुख ओम अमरनाथ खत्री के अनुसार गाइड लाइन के अनुरूप ही उत्सव को प्रतीकात्मक रूप से मनाएंगे।
11 फीट ऊंचे रावण के पुतले का दहन किया जाएगा। श्रीराम-लखन, हनुमान का पूजन होगा, शमी पूजन होगा। महाकालेश्वर की सवारी महाकाल मंदिर से शाम 4 बजे रवाना होकर दशहरा मैदान आती है। रावण के पुतले का मुंह कोरोना की तरह बनाया गया है तथा उसकी जीभ आगे निकली होगी।
शिप्रा तट पर 21 फीट ऊंचे रावण के पुतले का दहन
शिप्रा तट पर होने वाले उत्सव में 11 फीट ऊंचे रावण का ही दहन होगा। कैलाश विजयवर्गीय के अनुसार गुरु बृहस्पति की पालकी, राम-लखन की शोभायात्रा निकलेगी। शास्त्रीनगर में भी प्रतीकात्मक रावण दहन ही होगा। जयसिंह दरबार का कहना है कि गाइड लाइन का पालन होगा। सिद्धवट भैरवगढ़ पर 27 को 11 फीट ऊंचे रावण के पुतले का दहन होगा।
राघवेंद्र चतुर्वेदी के अनुसार उत्सव में कोरोना संक्रमण की रोकथाम का संदेश देने के लिए रावण के सभी चेहरों पर मास्क रहेगा तथा हाथ में सैनिटाइजर की बोतल होगी। नानाखेड़ा दशहरा समिति द्वारा नानाखेड़ा में 26 को प्रतीकात्मक रावण दहन किया जाएगा।